समय बहुत महत्वपूर्ण होता है निकल जाने के पश्चात वापस नही आता है अपना अनुभव कहता है कि व्यक्ति को उसकी मातृ भाषा के अतिरिक्त अगर कुछ भी अध्ययन करना पड़ें तो उसके सीखने में बहुत समय लगता हैं क्योंकि हमारा मन किसी भी नई वस्तु को जानने पर उसे पहले से जानी गई वस्तु के रूप में विचार करता है ततपश्चात उसे स्मरण आदि करने की कोशिश करता है।अब आप विचार करें कि मान लीजिए चिकित्सा शास्त्र आपने आरम्भ से ही हिंदी में पढ़ा हो या पढ़ते हो तो उसे कितनी देर में सीखेंगे और उसी शास्त्र को आप आरम्भ से ही इंग्लिश में सीखना आरम्भ करें।मान लीजिए आपकी मातृ भाषा हिंदी है और अपने इंग्लिश भी पढ़ी है।
तो किस भाषा मे आप उस विषय को जल्दी पकड़ लेंगे?
मेरा अनुभव विज्ञान के क्षेत्र में कहता है हिंदी में।और इंजीनियरिंग जो पूरी इंग्लिश में थी तो उसमे समझने में ही इतना समय लग जाता था अब परीक्षा आ गई सेमेस्टर दिया खेल खत्म।अब कोई स्मरण नहीं।
ये ही अगर मातृ भाषा या हिंदी में होता तो?
मेकेनेकील इंजिनियरिंग सबसे कठिन लगती थी उसके लेब में कुछ समझ नही आता था तो मेरा दोस्त Anand Bohra मुझे वो सब "मारवाड़ी" में समझाता था।बस उतना ही।
उसके बाद उस को मैं पढ़ लेता तो अपने शब्दों में जोड़ तोड़ की इंग्लिश बना देता और बेड़ा पार हो गया।समस्या उससे भी गम्भीर आई सी लेंग्वेज में।उसका क्या किया जाए?समझ नही आया।लेट us सी खरीदी।और किसी भी दूसरे से समझने से पहले पढ़ मारी।पर?प्रोग्रामिंग😢।
तो पहले पकड़ा Saurabh Vyas को।वो ही समझाना मारवाड़ी में।बस एक क्लास लगी।उसमे मारवाड़ी में ही मेरा उस सेम का सेलेब्स कम्प्लीट।फिर भी हजम नही हुवा।तो मारवाड़ी में ही इस विषय ने गप्पे Rounak Bhansali से Sushil Purohit से Shekhar Kansara से ओर भी लोग थे।कुल मिला कर इसमे भी बेड़ा पार।
विचारणीय बात है कि विषय नया हो तो भी सरलता से समझ मे मातृ भाषा मे ही आता है।ऐसे बहुत से विषय थे कि जो दोस्तो के साथ मारवाड़ी या हिंदी में चर्चा कर कर के ही समझ आये परीक्षा में लिखा उनको भले ही इंग्लिश में था पर समझ मे आये तो अपनी भाषा मे।
तो जो अगर सारा विषय ही स्वयं की भाषा मे पढ़ना पड़े तो?
भारतीय क्या से क्या नही कर देंगे?
तो किस भाषा मे आप उस विषय को जल्दी पकड़ लेंगे?
मेरा अनुभव विज्ञान के क्षेत्र में कहता है हिंदी में।और इंजीनियरिंग जो पूरी इंग्लिश में थी तो उसमे समझने में ही इतना समय लग जाता था अब परीक्षा आ गई सेमेस्टर दिया खेल खत्म।अब कोई स्मरण नहीं।
ये ही अगर मातृ भाषा या हिंदी में होता तो?
मेकेनेकील इंजिनियरिंग सबसे कठिन लगती थी उसके लेब में कुछ समझ नही आता था तो मेरा दोस्त Anand Bohra मुझे वो सब "मारवाड़ी" में समझाता था।बस उतना ही।
उसके बाद उस को मैं पढ़ लेता तो अपने शब्दों में जोड़ तोड़ की इंग्लिश बना देता और बेड़ा पार हो गया।समस्या उससे भी गम्भीर आई सी लेंग्वेज में।उसका क्या किया जाए?समझ नही आया।लेट us सी खरीदी।और किसी भी दूसरे से समझने से पहले पढ़ मारी।पर?प्रोग्रामिंग😢।
तो पहले पकड़ा Saurabh Vyas को।वो ही समझाना मारवाड़ी में।बस एक क्लास लगी।उसमे मारवाड़ी में ही मेरा उस सेम का सेलेब्स कम्प्लीट।फिर भी हजम नही हुवा।तो मारवाड़ी में ही इस विषय ने गप्पे Rounak Bhansali से Sushil Purohit से Shekhar Kansara से ओर भी लोग थे।कुल मिला कर इसमे भी बेड़ा पार।
विचारणीय बात है कि विषय नया हो तो भी सरलता से समझ मे मातृ भाषा मे ही आता है।ऐसे बहुत से विषय थे कि जो दोस्तो के साथ मारवाड़ी या हिंदी में चर्चा कर कर के ही समझ आये परीक्षा में लिखा उनको भले ही इंग्लिश में था पर समझ मे आये तो अपनी भाषा मे।
तो जो अगर सारा विषय ही स्वयं की भाषा मे पढ़ना पड़े तो?
भारतीय क्या से क्या नही कर देंगे?

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