निर्लज्ज जातिवाद और साम्प्रदायिकवाद की जरूरत नही है आप अपना काम गिनाओ।वोट किसको देना है मतदाता तय कर लेंगे।राजनीति में रुचि रखने वाले लोगो के सार्वजनिक पोस्ट अत्यंत निराशा जनक है मुझे अंधकार मय दिखता है बहुत कम है जो अपना काम बता रहे है बस ब्राह्मण को जिताओ ब्राह्मण को हराओ।पुष्करणा को टिकट दिया पुष्करणा को टिकट नही दिया।अरे तुम पढ़े लिखे हो या गधे हो?हद मूर्खता है।ये हाल तब है जब पुष्करणा लगभग शत प्रतिशत साक्षर है।
पढ़ लिख ने भी धूळ फाँकी।
दूजो रे देखा देखी थोरो गुण थे केन लेवने छोड़ो?थोड़ा बडेरा भी कोणी करियो एडो कदेई।
सत्ता एड़ी जरूरी चीज व्हे?थोरी जिम्मेदारी ही कि थे हिन्दुओ ने हमझावता कि भाई जाती-पाती छोड़ ने हम राष्ट्र धर्म रों कोम माते बात करो उन माते ही सब चली।पण केडो घोर कलजुग आयो।
कई कॉम माते बात नही बस पुष्करणा रे खिलाफ पुष्करणा रे पक्ष में।ओछी बात।
ठीक व्हे हेंगो ने दिखे राजनीति आँखियी फूटोडी कोणी पण थे थोरो धर्म क्यो छोड़ो?
अपोने भाईचारे रि प्रेम री सद्भाव री काम काज री।ईमानदारी उ जीवन यापन करने इज बात करनी।वो इज करणों।
आ इज बडेरा हीखा ने गया हा।
राजनीति रे कारण सत्ता हड़पनी अगर होचता तो कदे जयनारायण जी पद कोणी छोड़ता रामराज जी कदे ही पोस्ट ले लेता।
इण वास्ते देख भाल ने लिखो।किनी भी जाति धर्म रे खिलाफ लिखनी जगह मुद्दों री बात करो।तो इज थोरी चोखी लागी वरना भुंडी इज लगानी हॉ।
जातिवाद किसी भी जाति का भला नही करता है।उससे बचकर रहें।और मतदाता बन कर ही विचार करें।
कृपया प्रतिनिधि चुने जाती नही।
Saturday, November 17, 2018
निराश करता निर्लज्ज जातिवाद और सम्प्रदायवाद।
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