Friday, November 16, 2018

#अयोध्या अयोध्या करती है आह्वान वहां बैठा दें राम भगवान

#अयोध्या आज मैं बहुत प्रसन्न हूँ।आप की कल्पना में नहीं हो सकता है कि ये क्या हुवा है।हिन्दू समाज की आत्मा है भगवान श्री राम।राजा कोई होगा तो हम उसको राम के पैमाने से तोलेंगे।राम हमारे रोम रोम में बसते है हिन्दू छत्र को धारण करने वाले सभी लोग सभी राजे रजवाड़े नेता पेशवा मण्डलेशर महमण्डलेशर आदि आदि सभी जो कोई भी सत्ता,राजनीति,सरकार आदि आदि में है और हिन्दू है उन सबके आदर्श भगवान श्री राम हैं उनके प्रत्येक कृत्य उनके प्रत्येक पग हमारे लिए अनुकरणीय है अतः जब यूनानियों ने आक्रमण किया तो मिनेण्डर ने इस अयोध्या को ध्वस्त किया क्यों किया?
क्योंकि हिंदुओं का मनोबल टूट जाये।ताकि हिन्दू पराजित होकर गुलाम बन जावें।पर हिंदुओं ने उसको ठोक पिट कर भगा दिया।उसके बाद सैकड़ो सालों तक किसी भी विदेशी आक्रांता की हिम्मत नही हुई उस तरफ जाने कि मध्य काल मे हिंदुओं का सामर्थ्य सो गया हिन्दू इतने स्वार्थी हो गए कि भाई से भाई लड़ता था इस आपसी फूट का लाभ तुर्क तातार मंगोल पठान अफगान मुगल पुर्तगाली डच अंग्रेज फ्रेंच ने उठाया जिसमें से मुगलों के आक्रमण कारी बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने तोपों से भगवान श्री राम के जन्म स्थान को उड़ा दिया उस दिन अयोध्या जी हजारों हिन्दू गृहस्थों और सैकड़ों साधुओं वैरागियों ने अपने प्राण दिए थे तब से लगातार हिन्दू समाज कोशिश में है भगवान के जन्मस्थान को वापस लेने की।उसके साथ ही भगवान श्री राम की अयोध्या जी का नाम तक मिटाने के लिए उसको "फैजाबाद" नाम दे दिया।सरकारी रिकॉर्ड में भी अयोध्या-जिसको जीता न जा सकें उसका जिक्र तक नही आवें इसकी व्यवस्था की गई।
कब तक सत्य को दबा सकते है?कब तक हिंदुओं के उत्थान को रोक सकते हैं?आज जब ये नाम बदला है तो लगता है हिंदुओं ने अपना स्वाभिमान वापस पाया है।
नाम मे क्या है?
भाई नाम मे बहुत कुछ हैं।
नाम मे तो 10 हजार साल की पूरी संस्कृति है नाम से ही तो मुक्ति है।
क्यों नहीं है?
लेके देखो न एक बार राम नाम।पता चलेगा सामर्थ्य इसका।
हमने लियाहै, लेते है आगे भी लेंगे।अंतिम सांस तक लेंगे।गुरू गोरखनाथ हिन्दुओ के सबसे पुराने पर सबसे प्रगतिशील सम्प्रदाय के प्रवर्त्तक है स्वयं शंकर के अवतार हैं।उनका सम्प्रदाय भारत भर में फैला है उनके साधु महंत जोगी वैरागी कठोर साधना करते है जिस फकीरी का प्रभाव केवल नाथों में ही नही था बल्कि कबीरसाहेब तक उसका असर आता है कबीरसाहेब कहते है
तू कहता कागज की लेखी
मैं कहता अंखियन की देखी
नाथों के साधु जोगी लोग पुस्तको से ज्यादा हठ योग,ध्यान धारणा समाधि आदि में बहुत आगे है जिसका स्पष्ट प्रभाव है बड़ा ही मार्मिक है।
हिन्दुओ की रक्षार्थ इन्होंने बहुत युध्द किया है जदुनाथ सरकार की एक पुस्तक में मैने पढा था कि एक बार इन्होंने मारवाड़ रियासत को भी बचाया था।चिमटा लिए
अलग निरंजन बोल कर विदेशी हमलावरों से भिड़ जाने वाले ये लोग।निश्चित हिन्दू धर्म का उद्धार करेंगे।
भगवान श्री राम के उच्च आदर्श की उनके उस परम सत्य की उनके वचन कि उनके जीवन की हम स्थापना अपनर हृदय में भी और अपने जीवन मे भी करेंगे।निश्चित करेंगे।
जय जय श्री राम।
सियाराम मय सब जग जानी।
जो होई सोई राम रचित राखा।
"जो जिव चाहे मुक्तिको तो सुमरिजे राम।
हरिया गैले चालतां जैसे आवे गाम।।

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