Monday, November 19, 2018

प्रेम भाव से मिलें हम,रोकेंगे सब दुर्भाव हम

सदियों से पुष्करणा ब्राह्मण और माली समाज साथ साथ रहते आये है न मेरे पिता जी ने कभी बताया न मेरे दादा जी ने कभी बताया कि एक भी मतलब एक भी ऐसी घटना हुई हो जहाँ इन दोनों के बीच कभी भी कैसा भी कोई विवाद या झगड़ा या मन मुटाव हुवा हो।मेरे तो अनेको अनेक अभिन्न मित्र है।मैं निरन्तर उनसे मार्गदर्शन लेता रहता हूँ उनका अत्यंत सम्मान करता हूँ वो मेरे को टोक भी सकते है ऐसा भी कह देते है " भासा यूं नही बोलणो,यूं नही करणों"।अनेको ठेकेदार,कर्मी भी मेरे अत्यंत प्रिय है वो मुझे न केवल व्यवहारिक ज्ञान बल्कि उत्कृष्ट कोटि का तकनीक ज्ञान भी सिखाते है फिर वो अत्यंत सुशिक्षित मेरे बॉस हो या साधरण या कम पढे पर सड़क भवन आदि निर्माण के अत्यंत विशेषज्ञ।
ये कैसी घटिया राजनीति आई जिसने इस भाईचारे को तोड़ने की कोशिश की।मैं ऐसी सभी राजनीति और राजनीति दलों व्यक्तियों का विरोधी हूँ जो हमारे बीच फुट डालने की कोशिश कर रहे हैं।मेरे घर पर माली समाज के जुड़े संघ के अत्यंत वरिष्ठ जनों का बहुत स्नेह है प्रेम है।
प्रति दिन का मिलना जुलना है।
पता नहीं इन नेताओं की अक्ल पर कैसा पर्दा पड़ गया है।जो लड़ाने झगड़ने की कोशिश में है ताकि स्वयं का लाभ ले सकें।
भाई जी हमको सत्ता से प्यार नही है हमको अनीति के धन से प्यार नही है हमको हमारी माँ से बहुत प्यार है भारत माँ बहुत प्यारी है हमारे सारे ये मित्र  मार्गदर्शक गुरुजन सहकर्मी ठेकेदार कर्मी आदि सभी बहुत प्यारे है।
मेरा सभी मतदाताओं से निवेदन है कि कैसे भी उन्मादी तत्वों के बहकावे में न आवें और इस भाई चारे को खत्म न करें।
नख से लेके सर तक राजनीति गप्पे हांकने के बाद भी मुझे राजनीति से सख्त नफरत है।राजस्थान में ऐसा घटियापन मेने पहली बार देखा है।
क्रांति कथा नग घूम रहे है गुमनामी की राहों में
गुंडे तस्कर फिरते है राजधर्म की बाहों में

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