Friday, November 16, 2018

अयोध्या जी का इतिहास बहुत प्राचीन है

अयोध्या जी का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना ऋग्वेद के इतिहास है।भगवान श्री राम की यह जन्मस्थली तो है ही प्रतापी रघुवंशी राजाओ का स्थल है बल्कि रघु से भी पहले का विस्तृत राज्य था।माननीय उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश की बेंच ने इन लेफ्ट हिस्टोरियन के दावों को नकार कर राम जी की अयोध्या को सप्रमाण माना।न केवल माना बल्कि ये तथकथित हिस्टोरियन वहां पर से माफी मांग कर ही छूट पावें इनकी बहुत बुरी गत बनी न्यायालय में।हिन्दू समाज कितना भलमानस है जो इन लेफ्ट हिस्टोरियन कम फ्रॉड को कुछ नही कह रहा है वरना भगवान श्री राम के ऊपर टिका टिप्पणी कितनी मंहगी पड़ सकती थी अगर ऐसा ही किसी दूसरे मजहब के साथ किया होता।वरिष्ठ लेखिका मीनाक्षी जैन ने विस्तार से इन हिस्टोरियन की पोल उप हाईकोर्ट के जजमेंट में इनके द्वारा दिये गए शपथ पत्रों और स्वीकारोक्ति के आधार पर खोली है।भगवान श्री राम की टेरोकोटा जो भीतरगांव से प्राप्त हुई थी जिसका काल खंड 5 वी शताब्दी ईसापूर्व माना गया है जो अभी usa के ब्रुकलिन म्यूजियम में है और अहल्या द्वारा राम जी को फल देने वाला पांचवी शताव्दी ईसा पूर्व का टेरोकोटा देवगढ़ से प्राप्त हुवा था नेशनल म्यूजिम दिल्ली में है तो तीसरी शताब्दी ईसापूर्व की राम जी की मूर्त्ति जिस पर ब्राह्मी में राम लिखा है वो नाचर खेड़ा सेप्राप्त हुवा था स्पष्ट है कि राम जी के बारे इन लेफ्ट हिस्टोरियन ने झूठ फैलाया और अयोध्या को ही विवादास्पद बनाने की कोशीश की जबकि इस केम्प में कोई भी मतलब कोई भी पुरातत्व वेत्ता नही है और नही था।जिन्होंने भी पुरातत्व वेत्ता होने का दावा कर राम जी के मंदिर के खिलाफ जाकर कोर्ट में कहा जब कोर्ट में मामला आगे बढ़ गया तो ऐसे फर्जी लेफ्ट पुरातत्व वेत्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी खुदाई नही की।कभी अयोध्या तक नही गए।
हो हिन्दू कितना उदार है जो ऐसे बेईमानो को छोड़ देता है।प्रस्तुत चित्र मीनाक्षी जी की बुक से लिया है मेने।

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