जब पलाश के फूलों से
मधुबन खिल जाता
भौंरों का गुंजन साम गान हो जाता
चंग की थाप नभ में सुनाई देती
उड़ती गुलाल की
भीगे रंगों की महक से
महक जाता मेरा जीवन
जब सखी तुम रंग से
श्रंगार किया करती हो
नंदन वन अप्सरा
संकुचा सी जाती हैं
होली भरती नया रंग
जीवन में आ जाता
सत चित आनन्द
हां सत चित आनन्द
Tuesday, February 27, 2018
होली का आनन्द
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