मेरी तुकबंदी पर
खिलना तेरा
मेरे बचपने पर
हंसना तेरा
मेरी बिखरी किताबे
समेटना तेरा
मेरे जीवन को
संवारना तेरा
मुझे मेरे होने का
अहसास कराना तेरा
मुझे गहराई से
चाहना तेरा
बता यार क्या क्या
बोलू
चाहत का ये अफसाना
कैसे खोलूं
मैं हूँ ऐसा ही
उलझा उलझा सा
बिखरा बिखरा सा
तुने बनाया मुझे
तुने उठाया मुझे
क्या देउ तुझे
कुछ मेरा अब
बचा नही मुझमें
Saturday, February 10, 2018
शोभना प्रेम
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