मैं राजस्थानी
मेरी जात हिंदुस्थानी
सीने मेहजारो सालो की
आग लिये बैठा हूँ
बप्पा रावल का तेज
पद्मिनी का त्याग लिए बैठा हूँ
गौ माता के लिए चँवरी से
उठ जाने वाले
तेजा पाबू हरबू का
शौर्य लिए बैठा हूँ
जीवन क्या है?
चंद पल का सपना
जंगल जंगल फिरने वाले
प्रताप का उद्यम लिए बैठा हूँ
पीढ़ियों तक बेटा देने वाले
परिवारों का सम्मान लिए बैठा हूँ
मैं फिल्मी कोटो पर जाया नही करता
मैं बलिदानी वीरों के त्याग को
लजाया नही करता
मेरा रोम रोम ऋणी इनका
चारण भांड हमारे अपने
तुम वो नही हो
ये बलिदानो के गायक थे
कंजर चांडाल हमारे अपने
जंगल चिता के नायक हैं
तुम जाने कौन हो
जो माँ को नचाया करते है
जाने कौन सी नस्ल के हो
कैसा धन्धा करते हो
तेरे वो फर्जी बिके
मिलॉर्ड!!!
मेरा सम्मान नही हो सकते
पैसों से बिक जाने वाले
कानून नही हो सकते
हूँ राजस्थानी
गीत जौहर के ही
गाऊंगा
बात प्रताप की सुनाऊंगा
इनके मार्ग का
चारण हो जाउ तो
धन्य मेरा जीवन
चांडाल बन
तम आग लगाउ तो
धन्य मेरा जीवन
तलवारो से लिखा इतिहास
जाके देखो
चित्तौड़ का जर्रा जर्रा
माँ पद्मिनी की
यशोगाथा गाता है
विजय स्तम्भ पर बैठ
मेने सुना उसे
किया बहुत सा क्रंदन
माँ होता मैं भी
माँ होता मैं भी
बलिदानी जीवन
Saturday, February 10, 2018
राजस्थानी
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