Sunday, August 12, 2018

नायपॉल का चला जाना

मेने भारत एक आहत सभ्यता को बार बार पढ़ा। लेखक ने एक बाहरी और एक भारतीय दोनो की भूमिका का एक साथ निर्वाह किया है।गांधी,गरीबी और बाहरी आध्यत्मिक पुट की समालोचना सोचने को मजबूर कर देती है शिवसेना की मजदूर शाखा के झोपड़पट्टी वासी की झोपड़ी में बाबा साहब की तश्वीर और वहां का वर्णन जीवन्त जान पड़ता है।
नायपॉल का अपने आस पास के घटनाक्रम का वर्णन सजीव हो उठता है एमन्ग द बिलिवर्स एक तरीके से भविष्यवाणी है विश्व ने जो isis जैसे को भोगा व भोग रहा है उसके बीज की व्याख्या बड़े सलीके से बताई है।
रामजन्म भूमि जन आंदोलन को हिन्दुओ और हिंदुस्थान का एक नया करवट एक अध्याय मानने वाले चंद लेखकों में से एक।
खरी खरी लिखने की जिद्द ही नोबल में देरी करवाती है।
शत शत नमन।
हिंदुओं को अपने हीरे की परख नहीं है ये नायपॉल को देख के पता चल जाता है।

Wednesday, July 18, 2018

कलाम साहब

भारतीय परंपरा में अनेकों महान पुरुष हुए हैं अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से राष्ट्र को महान बनाने में अदभुत योगदान दिया। प्राचीन काल में इस प्रकार का मानव हित का चिंतन करने वाले ऋषि कहे जाते थे और जो समाज की रक्षा और हित चिंतन करते उनको देव कहते थे और कोई कोई ऐसे विरले होते जो समय की धारा को पलटकर मानवता की उन्नति में मील का पत्थर बनते अवतार कहे जाते थे एक आम हिंदू मन मनुष्य को सामान्य व्यक्ति की श्रेणी से उठाकर ईश्वर के समक्ष ले जाने में भी संकोच नहीं करता है। हिंदू धर्म शास्त्र प्रत्येक व्यक्ति के अंदर ईश्वर की अभिव्यक्ति मानते हैं किसी भी व्यक्ति को उसके कर्तव्य कर्म के द्वारा ईश्वर तक ले जाने को भारतीय परंपरा में अनुचित नहीं माना गया है।

अगर अगर हम प्रश्न पूछे आधुनिक समय में सबसे ज्यादा स्वीकार्य कौन से महापुरुष है तो हमारे दिमाग में तुरंत ही स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी का नाम आ जाएगा अगर हम इस प्रश्न को थोड़ा और जटिल बनाते हुए पूछें कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा स्नेह चाहने वाले कौन व्यक्ति हुए हैं हो सकता है थोड़ी देर के लिए हमको सोचना पड़े लेकिन अधिकांश भारतीयों के लिए वह नाम जो होगा वह एपीजे अब्दुल कलाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महानतम वैज्ञानिक।

भारतीय भारतीय लोग किसी भी विषय का गहन चिंतन कर आविष्कार करने वाले को ऋषि कहते थे आधुनिक भारत के ऋषि मुनि हमारे यह महान वैज्ञानिक है जिन्होंने भारत को उन्नत बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया है जिनके कारण भारत आज तरक्की की राह पर है उस परंपरा के वाहक है कलाम साहब ।वह जनता के राष्ट्रपति थे सारी उम्र वह एक शिक्षक और विद्यार्थी बन कर रहे भारत के लोगों को विज्ञान के विषय में अधिक से अधिक रुचि उत्पन्न कर आगे बढ़ने को वह हमेशा प्रेरित करते रहे और रहेंगे। स्वामी जी विवेक विवेकानंद की ही तरह उनका विश्वास युवाओं और युवाओं के सपनों में था वह कहते थे ग्रामीण स्तर तक विज्ञान और आधुनिक ज्ञान का प्रकाश पहुंचे।

कलाम कलाम साहब भारत की सामाजिक सहिष्णुता और सौहार्द के जीते जागते प्रतीक हैं वह ना केवल एक वैज्ञानिक है बल्कि एक महान दार्शनिक भी थे जो एक साथ विज्ञान और धर्म के बुनियादी चिंतन को लेकर चलता है इसके लिए धर्म कोई बाहरी आडंबर नहीं है बल्कि मूलभूत सिद्धांत है। हमेशा से ही भारत में सभी मार्गों को ईश्वर का ही मार्ग कहे जाने की परंपरा रही है कलाम साहब उसी मार्ग के अनुगामी है।

इसीलिए इसीलिए एक सामान्य हिंदू मन में उनको ऋषि तुल्य मानकर उनका मंदिर जो बनाया दो क्रिकेटर मोहम्मद कैफ भी तारीफ करने से अपने आप को रोक नहीं पाए यही भारत की विशेषता है यही भारत का सम्मान है।

Tuesday, July 17, 2018

अग्नि परीक्षा

सुनो जानकी!!बूझो एक कहानी क्या तुम रोषित हो अपमानित हो लेकर #अग्निपरीक्षा की रवानी??
गम्भीर हो कर पूछा
अगस्त पत्नी ने,
बताओ व्यथा तुम्हारी क्या तुम्हारे मन में
सुनकर जरा सी चोंकी जानकी
कुछ मचलाई सी
तत्प् ताम्र मुख से बोली हर्षाई सी
क्षमा करना भगवती
माता हो आप हमारी
कुछ कटु बोल  जाऊ तो
राम मेरे ईश्वर है,
राम मेरे जगदीश है,
श्रद्धा है विश्वास है,
मेरे जीवन की धड़कन
मेरे रोम रोम की आश है
नही ली मेरी कभी परीक्षा,
न कोई अपमान किया,
मेरे खातिर बहाया लहू,
अपना श्रम साध्य किया
अग्नि है मुर्ख स्त्रियों पुरुषो की वाणी
अग्नि है राम द्रोही की निशानी
मैं राम की ह्र्दयगामिनि
कोई पापी दुरात्मा होगा
जो करेगा राम से द्रोह,
रावण मेरे तेज को,
सहन नही कर सकता था,
मित्र मन्दोदरि सारा तारा त्रिजटा के आदेश को रोक नही सकता था
नाना सुमाली के संदेशो को लांघ कैसे वो आ सकता था
मूर्खो की ही है वाणी जो रावण का गुणगान करती हो कलियुग में आएगा समय ऐसा
यवनो के प्रवाह में उन्मुक्त
जीवन की चाह में नर नारी होंगे बर्बाद
उनको सीताराम का आदर्श ही बचाएगा
रहेगा हरदम साथ
जो उनमें से प्रभावित होंगे
वो सीताराम का अपमान करेंगे
नित नए निर्लज्ज आरोप से
चरित्र अपना खराब करेंगे
सबसे बड़ा है माते रामसीता का प्रेम
मेरे वो मैं उनकी
बाकी कौन होते है पूछने वाले??
राम ने मुझे हमेशा बराबर माना दिया
धनुष कटी पर खड्ग बाँधा सुनो देवी!!
मैं रण का सञ्चालन करती थी
घायल पीड़ित सेना का चिकित्सा मैं करती थी
हम तीनो ने मिलकर दंडकारण्य राक्षस शून्य किया ऋषि जीवन को निरापद किया माते
जो भी सीताराम द्रोही हो तुम करना उनका निषेध
असज्जन पापी और भर्मित जीव ही राम द्रोह पाते है
पर वो पिता समान सबको क्षमा करते जाते है
क्षमा करते जाते है।-

Saturday, July 14, 2018

भारतीय राष्ट्रवाद और हिमा दास

राष्ट्र गान के समय हिमा दास के आंखों के दो बूंद आंसू राष्ट्रवाद के अनेकों लेखों से भी ज्यादा अच्छे तरीके से राष्ट्र उसके चिंतन को व्यक्त कर देते है अत्यंत अभावों से उठ कर सफलता का सूर्य देखने वाले कभी अभाव का रोना नही रोते।आधुनिक भारतीय राष्ट्रवाद की प्रतीक बन गई है हिमा दास।आज की तारीख में सबसे ज्यादा शेयर किया जाने वाला वीडियो और चित्र है ये।खेल भारत को जोड़ता है खेल में वो ऊर्जा होती है जो युवाओं में जोश भर देती है खेलो में भी एथेलीट का बहुत महत्व होता है 100 मीटर और 200 मीटर की रेस जीतने वाला सबसे बड़ा हीरो समझा जाता है बाकी की रेस का भी बहुत महत्व है।जब ओलंपिक देखता हूँ छोटे छोटे देशों से अदभुत एथलीट निकलते है अपने देश को लेकर विषाद होता है उस नैराश्य को पिछले कुछ सालों में अनेको ने दूर किया है और हिमा ने अपना दमखम बता दिया है जो भी कभी खिलाड़ी रहा है उसको पता है आधा सेकंड भी कम करना बहुत मुश्किल होता है।वर्षो की हाड़ तोड़ मेहनत करनी पड़ती है मिलता कुछ नहीं है।भारत के प्रधानमंत्री जी ने सही किया जो हिमा का वीडियो शेयर किया।इस प्रकार की सब प्रतिभाओं को सम्मान किया जाना बहुत आवश्यक है।

Saturday, March 31, 2018

अज्ञेय

कभी राजे सरदार अपने राज्य की सीमाएं लिखते थे दूसरों के लहू से। फिर सेठ साहूकार अपनी हवेलियों के नक्शे लिखते रहें दूसरों के लहू से। अब आपकी डिंग है कि आप की कविता लहू से लिखी जा रही है। पर किसके लहू से? आपका अपना तो वह नहीं है। यह मान भी लें कि आपको दूसरों का गम बहुत है- या कम आराम के साथ है; पर अगर आपकी कविता भी दूसरों के लहू से लिखी गई है, या कम से कम आपके अपने लहू से नहीं लिखी गई है, तो मुझे क्यों उसे उसकी कविता से अच्छा ही मानना चाहिए जिसने अपनी कविता खून से तो नहीं लिखी थी, पर अपने पसीने से लिखी थी तो अपने पसीने से लिखी थी, या सपनों से ही लिखी थी तो अपने सपनों से लिखी थी?- और आप को सुख देने के लिए और आपके सुख में अपना सुख मानते हुए लिखी थी? क्या आप लोगों की बात करके, या इस ढंग के कहके, मूल्यांकन की सारी प्रक्रिया को ही उचित नहीं कर रहे हैं?-अज्ञेय

Friday, March 23, 2018

शास्त्री शिवराम हरि राजगुरु

क्रान्तिकारियो की तश्वीरें आपने देखी होगी सभी बलिष्ठ और सुदर्शन नौजवान थे उन सबमें शिवराम हरि राजगुरु कृशकाय थे आप संस्कृत भाषा के विद्वान और लेखक थे और तर्कशास्त्र के जानकार थे।बाबा राव सावरकर से प्रभावित होकर आप क्रांति में सम्मिलती हुवे थे हनुमान प्रसार सिमिति में सबसे पहले जुड़े जो अखाड़ा चलाते थे और बुद्धि में वृध्दि करने सावरकर और विभिन्न क्रान्तिकारियो की जीवनियां पढ़ते पढ़ाते थे आपने काशी जाके पढ़ने का निश्चय किया आप काशी गए वहां आप संस्कृत का अध्ययन करने लगे मन मे अदम्य देशभक्ति थी ही तो वहां भी वो क्रान्ति कार्यो में रुचि लेने लगे।आजाद से भेंट के बाद तो पूरा ही क्रांतिकारी बन गए।
एक दिन आजाद ने सभी को बताया किआ अंग्रेज पुलिस के अत्याचारों को सहने योग्य शरीर को सख्त बनाना होगा।उस दिन बिना किसी को बताये राजगुरु रसोई में गए और चाकू को गर्म किया रक्त तप्त हो गया तो उसे अपने सीने में लगा दिया ऐसा सात बार किया।मुंह पर शिकन तक नहीं।
रात्रि में जब बहुत दर्द से नींद में ही आवाज आई तब पता चला आजाद को।
आप वीर सावरकर के परम भक्त थे आपने ही भगतसिंह कल हिन्दूपादपदशाही पुस्तक भगतसिंह को दी थी जिसके अनेको कोट्स भगतसिंह ने अपनी जेल की डायरी में किये है ये पुस्तक अंग्रेजो को तलाशी में राजगुरु के समान से मिली थी।आप का जीवंत सम्पर्क डॉक्टर हेडगेवार से था संघ की स्थापना के बाद एक बार ये फरारी में नागपुर आये थे डॉक्टर जी से मिले थे तब डॉक्टर जी ने उनको एक कर्तकर्त्ता के घर छुपा कर रखा था।
आपका स्वभाव हँसमुख था और आप ईश्वर के परमभक्त थे।भगतसिंह से आपकी मजाक नुमा नोकझोंक चलती रहती थी जब भगतसिंह ने इनको दूध पिला कर भूख हड़ताल से हटवाया तो इनको मजाक में बोले कि तुम सोचते हो कि मेरे से पहले पहुंच जाओगे पर मैं ऐसा होने नही दूंगा अब तो जवाब में शिवराम ने कहा कि मैने सोचा था कि स्वर्ग में पहले जाके तुम्हारे लिए कमरा बुक रखूंगा पर अब ये हो नही सकेगा।
इनके बहुत से विनोद पूर्ण किस्से भगतसिंह और आजाद के साथ के है।

तुम हमेशा याद आओगे भगतसिंह

अगर सरदार भगतसिंह न होते तो कदाचित भारतीय क्रान्ति का इतिहास लोह शिकंजो में दफन हो जाता।जितना इस महावीर को पढ़ता हूँ उतना कृतज्ञता से भर जाता हूँ।कभी बी एस सिंधु कभी बलवंत सिंह कभी विद्रोही नाम से इसने लेखों की झड़ी लगा दी थी बहुत कम लोग आज जानते है कि भगतसिंह ने तब अनेको पत्रिकाओं में पुराने क्रान्तिकारियो के जीवन व्रत छापे थे क्या ग़दर पार्टी क्या कुका विद्रोह क्या काकोरी कांड क्या बब्बर अकाली क्या इंडिया हाउस?इनसे जुड़े हर क्रांतिकारी के बारे में भगतसिंह ने कही न कही लिखा है छपवाया है।उसके बाद भी ये अद्भुत क्रांति छिप न जाये तो स्वयं का बलिदान दिया था।चोट उस जगह की जहां पर लगने से आवाज ज्यादा होती है ताकि बहरे गूंगे भारतीयों केकानो में जहां फर्जी अहिंसा का नगाड़ा बज रहा था वहां सशस्त्र क्रांति के उच्च आदर्श पहुंचा सकें।और इस काम वो सफल रहें।
भारतीय क्रान्तिकारियो को वो अमर कर गए है उन पर जो भी अध्ययन करेगा वो एक के बाद एक ऐसे मतवाले नवयुवकों से परिचित होके चमत्कृत होता जाएगा।लगेगा बार बार भारत की धरती पर भगतसिंह आते है?एक ही समय मे इतने भगतसिंह थे?
तुम हमेशा याद आओगे भगतसिंह.......
जब तक भारत देश रहेगा तब तक तुम्हारा बलिदान याद किया जाएगा।तुमने न केवल साम्रज्यवाद ब्रिटिश को पराजीत कर दिया बल्कि उस झूठे अहिंसावाद को नष्ट कर दिए जिस पर चलने की भारत मे ऐतिहासिक भूल की थी.......फिर भी तुम्हारी फोटू नही लगी नॉट पर।कोई नही तुम्हारी फोटू लगी है हमारे दिल पर जिसको कोई नही हटा सकता...........