अगर सरदार भगतसिंह न होते तो कदाचित भारतीय क्रान्ति का इतिहास लोह शिकंजो में दफन हो जाता।जितना इस महावीर को पढ़ता हूँ उतना कृतज्ञता से भर जाता हूँ।कभी बी एस सिंधु कभी बलवंत सिंह कभी विद्रोही नाम से इसने लेखों की झड़ी लगा दी थी बहुत कम लोग आज जानते है कि भगतसिंह ने तब अनेको पत्रिकाओं में पुराने क्रान्तिकारियो के जीवन व्रत छापे थे क्या ग़दर पार्टी क्या कुका विद्रोह क्या काकोरी कांड क्या बब्बर अकाली क्या इंडिया हाउस?इनसे जुड़े हर क्रांतिकारी के बारे में भगतसिंह ने कही न कही लिखा है छपवाया है।उसके बाद भी ये अद्भुत क्रांति छिप न जाये तो स्वयं का बलिदान दिया था।चोट उस जगह की जहां पर लगने से आवाज ज्यादा होती है ताकि बहरे गूंगे भारतीयों केकानो में जहां फर्जी अहिंसा का नगाड़ा बज रहा था वहां सशस्त्र क्रांति के उच्च आदर्श पहुंचा सकें।और इस काम वो सफल रहें।
भारतीय क्रान्तिकारियो को वो अमर कर गए है उन पर जो भी अध्ययन करेगा वो एक के बाद एक ऐसे मतवाले नवयुवकों से परिचित होके चमत्कृत होता जाएगा।लगेगा बार बार भारत की धरती पर भगतसिंह आते है?एक ही समय मे इतने भगतसिंह थे?
तुम हमेशा याद आओगे भगतसिंह.......
जब तक भारत देश रहेगा तब तक तुम्हारा बलिदान याद किया जाएगा।तुमने न केवल साम्रज्यवाद ब्रिटिश को पराजीत कर दिया बल्कि उस झूठे अहिंसावाद को नष्ट कर दिए जिस पर चलने की भारत मे ऐतिहासिक भूल की थी.......फिर भी तुम्हारी फोटू नही लगी नॉट पर।कोई नही तुम्हारी फोटू लगी है हमारे दिल पर जिसको कोई नही हटा सकता...........
Friday, March 23, 2018
तुम हमेशा याद आओगे भगतसिंह
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment