Friday, November 16, 2018

नोटबंदी हिन्दुओ का सबसे बड़ा परिक्षण था

नोटबन्दी हिन्दू समाज का सबसे बड़ा परीक्षण था वो चाहता तो इसको मिनट में भूंगली बना सकता था जैसे कल मिलार्ड की बनाई थी अभी थोड़ी देर बाद फिर बनाने वाला है पर नोटबन्दी को हिन्दुओ ने पूरा समर्थन दिया।हिन्दुओ के बेईमान लोग तो इधर उधर दौड़ेंगे ही न?बेईमानो का काम ही दौड़ना है पर ऐसे चोर उच्चके ठगों को देख कर हिन्दुओ के दूसरे सामान्य लोग भी चोर बनना चाहते थे और है उनको तगड़ी चोट लगी है उनको ये पता तो चला न कि ऐसा भी हो सकता है।
आपका अथाह धन पड़ा रह जाता है काम तो व्यक्ति ही आता है धन नहीं। जो सत्य धर्म न्याय है वो ही टिकना है सत्य धर्म की नींव बहुत गहरी होती है हिन्दुओ को बार बार उखड़ना इसलिए पड़ता है क्योंकि वो अपनी नींव कच्ची बनाते है अनीति का धन सर्वनाश लाता है साथ में।
ईश्वर भी नही बचाता है।
अतः सत्य धर्म को पकड़ कर ही चलें इसमे आनंद बहुत है कष्ट नहीं है कुछ भी।जो अगर कष्ट भी आवें तो भी उसको सरलता से लेंवे तो भी वो भी आनंद लगेगा।
जय श्री राम
जय जय श्री राम।

जिम्मेदारो में समझ की कमी और अंहकार का होना हिन्दू समाज के पतन का कारण |

हिन्दू समाज की दुर्गत्ति का कारण समझ आ जाता है जिनको सारे देश के हिन्दू आदर देते है ऐसे महाराणा उदयपुर अपने सिटी पैलेस में महाराणा प्रताप से ज्यादा खुद के महिमा मंडन में लगे हैं।जिन मुगलों के कारण साका करना पड़ गया उसके तुलना में मराठे हमलावर है मुगलों से संधि कोई बड़ी घटना है महाराणा उदयसिंह महाराणा प्रताप और महाराणा अमर सिंह द्वारा लगातार 50 वर्षो के युद्ध का कोई जिक्र नहीं है हजारो लोग इसको पढ़ते है।पुस्तक विक्रय में महाराणा प्रताप पर कोई नया रिसर्च नहीं जबकि अंग्रेजो से संधि के साये में रहने वाले राणा का महिमा मंडन।सारे भारत के राजपूतों ने महाराणा प्रताप की तश्वीर और मूर्त्तियों को तो खूब प्रमोट किया पर उनके जीवन पर कोई अत्याधुनिक नवीन रिसर्च या कोई ऐसी पुस्तक जिसको दुसरो को बता सकें वैसा कुछ नहीं।
हाँ एक अच्छा ये हुवा की महारानी पद्मिनी पर तो फिर भी छप गया।यद्यपि महाराणा प्रताप पर पुस्तक उपलब्ध है पर वो ही ओझा जी से ज्यादा कुछ नहीं।ऐसे काम नही चलता।
है नही कोई राजस्थानी ऐसा जो ये कार्य कर सकें?
महाराणा प्रताप पर विस्तृत रिसर्च करके सरल इंग्लिश और हिंदी में पुस्तक छपवा सकें ताकि वो न केवल सर्व सुलभ बनें बल्कि महाराष्ट्र में जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिष्ठा है वैसी प्रतिष्ठा कम से कम राजस्थान में महाराणा प्रताप की बन सकें।सिटी पैलेस घूमते लिया गया हम दोनों का ये चित्र।श्रीमती जी बार बार पूछ रही थी कहा खोए हुवे हो।
खोए कहा,जब अपने ही हिन्दू समाज के भगवान श्री राम के प्रतिनिधि माने जाने वालों की नादानी देखे तो क्या कहें किस को कहें।
जब याद हमें महाराणा की आती है
आंखों से नीर की नदियां बह जाती है

अयोध्या जी का इतिहास बहुत प्राचीन है

अयोध्या जी का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना ऋग्वेद के इतिहास है।भगवान श्री राम की यह जन्मस्थली तो है ही प्रतापी रघुवंशी राजाओ का स्थल है बल्कि रघु से भी पहले का विस्तृत राज्य था।माननीय उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश की बेंच ने इन लेफ्ट हिस्टोरियन के दावों को नकार कर राम जी की अयोध्या को सप्रमाण माना।न केवल माना बल्कि ये तथकथित हिस्टोरियन वहां पर से माफी मांग कर ही छूट पावें इनकी बहुत बुरी गत बनी न्यायालय में।हिन्दू समाज कितना भलमानस है जो इन लेफ्ट हिस्टोरियन कम फ्रॉड को कुछ नही कह रहा है वरना भगवान श्री राम के ऊपर टिका टिप्पणी कितनी मंहगी पड़ सकती थी अगर ऐसा ही किसी दूसरे मजहब के साथ किया होता।वरिष्ठ लेखिका मीनाक्षी जैन ने विस्तार से इन हिस्टोरियन की पोल उप हाईकोर्ट के जजमेंट में इनके द्वारा दिये गए शपथ पत्रों और स्वीकारोक्ति के आधार पर खोली है।भगवान श्री राम की टेरोकोटा जो भीतरगांव से प्राप्त हुई थी जिसका काल खंड 5 वी शताब्दी ईसापूर्व माना गया है जो अभी usa के ब्रुकलिन म्यूजियम में है और अहल्या द्वारा राम जी को फल देने वाला पांचवी शताव्दी ईसा पूर्व का टेरोकोटा देवगढ़ से प्राप्त हुवा था नेशनल म्यूजिम दिल्ली में है तो तीसरी शताब्दी ईसापूर्व की राम जी की मूर्त्ति जिस पर ब्राह्मी में राम लिखा है वो नाचर खेड़ा सेप्राप्त हुवा था स्पष्ट है कि राम जी के बारे इन लेफ्ट हिस्टोरियन ने झूठ फैलाया और अयोध्या को ही विवादास्पद बनाने की कोशीश की जबकि इस केम्प में कोई भी मतलब कोई भी पुरातत्व वेत्ता नही है और नही था।जिन्होंने भी पुरातत्व वेत्ता होने का दावा कर राम जी के मंदिर के खिलाफ जाकर कोर्ट में कहा जब कोर्ट में मामला आगे बढ़ गया तो ऐसे फर्जी लेफ्ट पुरातत्व वेत्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी खुदाई नही की।कभी अयोध्या तक नही गए।
हो हिन्दू कितना उदार है जो ऐसे बेईमानो को छोड़ देता है।प्रस्तुत चित्र मीनाक्षी जी की बुक से लिया है मेने।

Wednesday, November 7, 2018

पूज्य स्वामी ईश्वरानंद गिरी जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर उनके संस्मरण।

आज हमारे गुरुदेव पूज्य स्वामी ईश्वरानंद गिरी जी महाराज की पुण्य तिथि है संयोग से आज दीपोत्सव भी चल रहा है तो मुझे एक ऐसे ही दीपोत्सव के समय पूज्य श्री के साथ बिताए कुछ पल स्मरण में आ रहे है जिसको मेने अपने जीवन का ध्येय बनाने का प्रयास किया है कर रहा हूँ और पूज्य श्री का आशीर्वाद रहा तो आगे भी सहाय होंगे।
21 अक्टूम्बर 2006 की दीपावली सन्त सरोवर माउंट आबू पर ऐसा संयोग प्राप्त हुवा था स्वामी जी का सुबह 7 बजे सभी को दर्शन का लाभ प्राप्त हुवा या उसके पहले आ गए थे अभी ठीक से याद नहीं।सुबह सुबह महादेव की पूजा अर्चना के बाद मन अत्यधिक प्रसन्न था बहुत कम भक्त थे तो सरलता से बातचीत हो सकती थी मेरा कार्य तो केवल श्रवण करना ही था गुरू मुख से निकले गए ब्रह्म वाक्य जो सुनने में अमृत समान जान पड़ते थे उनको मैं सावधन होके सुन रहा था।स्वामी जी प्लेसमेंट के बाद उत्साहित एक विद्यार्थी साधक को सम्बोधित कर के कह रहे थे जिसको जॉब पर लगना था
"सारे विश्व को जान लिया पर आत्मा को न जाना तो इसका क्या अर्थ?
युवावस्था में लगता है कि सब चलता है देख लेंगे जो होगा जो?
पर आत्मा का संधान जरूरी है।
इसी आत्म साधना में जीवन के कर्म करते हुए "नाम" कमाना "धन" आए या न आए परवाह नहीं।
आत्म धन कमाना लौकिक धन जे साथ जरूरी है।"
उस क्षण मेरे पास न मोबाइल था न ही डायरी पर मैने स्मरण रखने की कोशिश की जो ही वो सत्संग पूरा हुवा समय मिलते ही इसको लिपिबद्ध करने की कोशिश की।सत्य है कि शब्द ये नही थे मुझे केवल भाव याद रहा।मेने उतना ही पकड़ा या पकड़ने की कोशिश की।
हमारे गुरूदेव "मेकेनिकल इंजीनियर" थे और जिस समय।उन्होंने डिग्री की थी उस समय के अभियन्ता दुर्लभ होते थे अगर उनको संसार का तनिक भी मोह होता तो उनके कदमो में बड़ा साम्राज्य होता।
अपने सभी प्रवचनों में वेदान्त,भक्ति,विज्ञान, इतिहास,परपंरा,इंजीनियरिंग,मेडिकल,आगम,साधना,तंत्र और भी बहुत ऐसा गूंथते थे कि साधक उस समय निश्चित ही संसार को भूल जाता।ऐसा हमारे अनेकों गुरू भ्राताओ का अनुभव है।
आज ही के दिन उन्होंने अपना ये चोला उतार दिया।पर उनके विचार सनातन है
हम सबके लिए पाथेय है गुरुदेव दुनिया इधर से उधर हो जावें पर हम आपके इन सिद्धान्तो पर ही चलने की कोशिश करेंगे।निरन्तर करेंगे।
जय गुरूदेव
जय शंकर।
शत शत नमन

Friday, September 21, 2018

चिर पुरातन

मैं तो हूँ चिर पुरातन
उठ आया यो निंद्रा से
क्षणिक बंधन है
दरिया पर पदचिन्ह से
कोई मेरी स्मृति संजोए
ये भी नही आस सी
बस यूं चलना जीवन मेरा
सृजित सम रसित प्यास सी

Monday, September 17, 2018

शिव शक्ति का नित्य चिद विलास

बहुत से हिन्दू द्रोही तत्व शिव शक्ति के पूजन को नर नारी के मिथुन पर आरोपित कर उसको अत्यंत हीन भावना से देखते है उसको अश्लील कहते है अव्वल तो ये वैसा विचार ही नहीं है अगर आप ऐसा सोचते है तो आपकी बुध्दि की खोट है चलें एक बार आपके लॉजिक को मान लें? तब भी कोई हानि नहीं मनुष्य जैसा है वैसा अभिव्यक्त होने में उसे झिझक कैसी?सृष्टि की उत्पत्ति ही उस लीला से हुई है उसमें पाप देखना क्रिश्चन कंसेप्ट है हिन्दू जीवन दृष्टि नहीं।हिन्दू धर्म अर्थ काम मोक्ष को लेके चलता है।
पर ये शिव-शक्ति तत्व उस के साम्य नहीं।शिव पूर्ण ब्रह्म है जो निष्क्रिय-अद्वैत है शक्ति उनकी माया है जिसके आसीन वो सृश्टु रचते है जगत हमको जो भासता है वो इस माया रूपी शक्ति से ही भासता है कुछ आर्यसमाजी बन्धु भी इसको अश्लील कहने लगे है धर्म द्रोहियों के अपप्रचार का शिकार होकर।शिव पर दूध चढ़ाने की भी बहुत आलोचना होती है पर बन्धुवर!!
कुछ भी अश्लील नही होता है विज्ञान की किताब में मानव शरीर का वर्णन भी आप को अश्लील लगता होगा?इस लॉजिक के हिसाब से आग में कुछ भी डालना परमेश्वर को मिलाना होता है?करोड़ो भूखे बच्चे है जिनके मुंह मे अन्न नही डाल रहे है आग में फालतू जला रहे है?कुतर्क का कोई जवाब नही होता है शिव नामक कोई प्रतिभा सम्पन्न महापुरुष नही हुवे बल्कि स्वयं परमेश्वर का नाम है ये।शिव लिङ्ग उसका प्रतीक है सारा जगत ही शिव रूप है विज्ञान कहता है कि सारा ब्रह्मांड ही अंडाकार ठोस रूप है जो हिरण्यगर्भ है ये हिरण्यगर्भ ही शिव है जिसका ही प्रतीक रूप शिवलिंङ्गः है।खोट आप की बुद्धि में है जिसको आप शिव पर आरोपित कर रहे है।

Saturday, September 8, 2018

कुत्तिया बड़ा सभ्य नाम

कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
इंसान के आते
बहुत काम
होते वफादार बहुत
घर रखवाली करते खूब
धना सेठो के बंगले
रक्षित इनसे सँगले
उनकी भाषा लेकिन
है बहुत गन्दा नाम
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
जो रोटी देता उनको
कभी नही काटते इनको
मर जाते लेकिन मालिक
आंच न आ पाती
देश द्रोही न होते
न हिन्दू को कोसते
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
दत्तात्रेय के गुरु है ये
युधिष्ठिर संग जाने वाले
स्वर्ग में जीवित
दुर्लभ काम करने वाले
जिस थाली में खाते
उसमे छेद कभी न करते
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
वो मूर्ख अज्ञानी
जो देशद्रोहियों को
कहते
लाज न आती उनको
इस पुण्य पावन जीव को
अपमानित यो करते
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम