बहुत से हिन्दू द्रोही तत्व शिव शक्ति के पूजन को नर नारी के मिथुन पर आरोपित कर उसको अत्यंत हीन भावना से देखते है उसको अश्लील कहते है अव्वल तो ये वैसा विचार ही नहीं है अगर आप ऐसा सोचते है तो आपकी बुध्दि की खोट है चलें एक बार आपके लॉजिक को मान लें? तब भी कोई हानि नहीं मनुष्य जैसा है वैसा अभिव्यक्त होने में उसे झिझक कैसी?सृष्टि की उत्पत्ति ही उस लीला से हुई है उसमें पाप देखना क्रिश्चन कंसेप्ट है हिन्दू जीवन दृष्टि नहीं।हिन्दू धर्म अर्थ काम मोक्ष को लेके चलता है।
पर ये शिव-शक्ति तत्व उस के साम्य नहीं।शिव पूर्ण ब्रह्म है जो निष्क्रिय-अद्वैत है शक्ति उनकी माया है जिसके आसीन वो सृश्टु रचते है जगत हमको जो भासता है वो इस माया रूपी शक्ति से ही भासता है कुछ आर्यसमाजी बन्धु भी इसको अश्लील कहने लगे है धर्म द्रोहियों के अपप्रचार का शिकार होकर।शिव पर दूध चढ़ाने की भी बहुत आलोचना होती है पर बन्धुवर!!
कुछ भी अश्लील नही होता है विज्ञान की किताब में मानव शरीर का वर्णन भी आप को अश्लील लगता होगा?इस लॉजिक के हिसाब से आग में कुछ भी डालना परमेश्वर को मिलाना होता है?करोड़ो भूखे बच्चे है जिनके मुंह मे अन्न नही डाल रहे है आग में फालतू जला रहे है?कुतर्क का कोई जवाब नही होता है शिव नामक कोई प्रतिभा सम्पन्न महापुरुष नही हुवे बल्कि स्वयं परमेश्वर का नाम है ये।शिव लिङ्ग उसका प्रतीक है सारा जगत ही शिव रूप है विज्ञान कहता है कि सारा ब्रह्मांड ही अंडाकार ठोस रूप है जो हिरण्यगर्भ है ये हिरण्यगर्भ ही शिव है जिसका ही प्रतीक रूप शिवलिंङ्गः है।खोट आप की बुद्धि में है जिसको आप शिव पर आरोपित कर रहे है।
पर ये शिव-शक्ति तत्व उस के साम्य नहीं।शिव पूर्ण ब्रह्म है जो निष्क्रिय-अद्वैत है शक्ति उनकी माया है जिसके आसीन वो सृश्टु रचते है जगत हमको जो भासता है वो इस माया रूपी शक्ति से ही भासता है कुछ आर्यसमाजी बन्धु भी इसको अश्लील कहने लगे है धर्म द्रोहियों के अपप्रचार का शिकार होकर।शिव पर दूध चढ़ाने की भी बहुत आलोचना होती है पर बन्धुवर!!
कुछ भी अश्लील नही होता है विज्ञान की किताब में मानव शरीर का वर्णन भी आप को अश्लील लगता होगा?इस लॉजिक के हिसाब से आग में कुछ भी डालना परमेश्वर को मिलाना होता है?करोड़ो भूखे बच्चे है जिनके मुंह मे अन्न नही डाल रहे है आग में फालतू जला रहे है?कुतर्क का कोई जवाब नही होता है शिव नामक कोई प्रतिभा सम्पन्न महापुरुष नही हुवे बल्कि स्वयं परमेश्वर का नाम है ये।शिव लिङ्ग उसका प्रतीक है सारा जगत ही शिव रूप है विज्ञान कहता है कि सारा ब्रह्मांड ही अंडाकार ठोस रूप है जो हिरण्यगर्भ है ये हिरण्यगर्भ ही शिव है जिसका ही प्रतीक रूप शिवलिंङ्गः है।खोट आप की बुद्धि में है जिसको आप शिव पर आरोपित कर रहे है।

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