मैं तो हूँ चिर पुरातन उठ आया यो निंद्रा से क्षणिक बंधन है दरिया पर पदचिन्ह से कोई मेरी स्मृति संजोए ये भी नही आस सी बस यूं चलना जीवन मेरा सृजित सम रसित प्यास सी
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