हो हिन्दू कितना उदार है जो ऐसे बेईमानो को छोड़ देता है।प्रस्तुत चित्र मीनाक्षी जी की बुक से लिया है मेने।
Friday, November 16, 2018
अयोध्या जी का इतिहास बहुत प्राचीन है
हो हिन्दू कितना उदार है जो ऐसे बेईमानो को छोड़ देता है।प्रस्तुत चित्र मीनाक्षी जी की बुक से लिया है मेने।
Wednesday, November 7, 2018
पूज्य स्वामी ईश्वरानंद गिरी जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर उनके संस्मरण।
21 अक्टूम्बर 2006 की दीपावली सन्त सरोवर माउंट आबू पर ऐसा संयोग प्राप्त हुवा था स्वामी जी का सुबह 7 बजे सभी को दर्शन का लाभ प्राप्त हुवा या उसके पहले आ गए थे अभी ठीक से याद नहीं।सुबह सुबह महादेव की पूजा अर्चना के बाद मन अत्यधिक प्रसन्न था बहुत कम भक्त थे तो सरलता से बातचीत हो सकती थी मेरा कार्य तो केवल श्रवण करना ही था गुरू मुख से निकले गए ब्रह्म वाक्य जो सुनने में अमृत समान जान पड़ते थे उनको मैं सावधन होके सुन रहा था।स्वामी जी प्लेसमेंट के बाद उत्साहित एक विद्यार्थी साधक को सम्बोधित कर के कह रहे थे जिसको जॉब पर लगना था
"सारे विश्व को जान लिया पर आत्मा को न जाना तो इसका क्या अर्थ?
युवावस्था में लगता है कि सब चलता है देख लेंगे जो होगा जो?
पर आत्मा का संधान जरूरी है।
इसी आत्म साधना में जीवन के कर्म करते हुए "नाम" कमाना "धन" आए या न आए परवाह नहीं।
आत्म धन कमाना लौकिक धन जे साथ जरूरी है।"
उस क्षण मेरे पास न मोबाइल था न ही डायरी पर मैने स्मरण रखने की कोशिश की जो ही वो सत्संग पूरा हुवा समय मिलते ही इसको लिपिबद्ध करने की कोशिश की।सत्य है कि शब्द ये नही थे मुझे केवल भाव याद रहा।मेने उतना ही पकड़ा या पकड़ने की कोशिश की।
हमारे गुरूदेव "मेकेनिकल इंजीनियर" थे और जिस समय।उन्होंने डिग्री की थी उस समय के अभियन्ता दुर्लभ होते थे अगर उनको संसार का तनिक भी मोह होता तो उनके कदमो में बड़ा साम्राज्य होता।
अपने सभी प्रवचनों में वेदान्त,भक्ति,विज्ञान, इतिहास,परपंरा,इंजीनियरिंग,मेडिकल,आगम,साधना,तंत्र और भी बहुत ऐसा गूंथते थे कि साधक उस समय निश्चित ही संसार को भूल जाता।ऐसा हमारे अनेकों गुरू भ्राताओ का अनुभव है।
आज ही के दिन उन्होंने अपना ये चोला उतार दिया।पर उनके विचार सनातन है
हम सबके लिए पाथेय है गुरुदेव दुनिया इधर से उधर हो जावें पर हम आपके इन सिद्धान्तो पर ही चलने की कोशिश करेंगे।निरन्तर करेंगे।
जय गुरूदेव
जय शंकर।
शत शत नमन
Friday, September 21, 2018
चिर पुरातन
मैं तो हूँ चिर पुरातन
उठ आया यो निंद्रा से
क्षणिक बंधन है
दरिया पर पदचिन्ह से
कोई मेरी स्मृति संजोए
ये भी नही आस सी
बस यूं चलना जीवन मेरा
सृजित सम रसित प्यास सी
Monday, September 17, 2018
शिव शक्ति का नित्य चिद विलास
पर ये शिव-शक्ति तत्व उस के साम्य नहीं।शिव पूर्ण ब्रह्म है जो निष्क्रिय-अद्वैत है शक्ति उनकी माया है जिसके आसीन वो सृश्टु रचते है जगत हमको जो भासता है वो इस माया रूपी शक्ति से ही भासता है कुछ आर्यसमाजी बन्धु भी इसको अश्लील कहने लगे है धर्म द्रोहियों के अपप्रचार का शिकार होकर।शिव पर दूध चढ़ाने की भी बहुत आलोचना होती है पर बन्धुवर!!
कुछ भी अश्लील नही होता है विज्ञान की किताब में मानव शरीर का वर्णन भी आप को अश्लील लगता होगा?इस लॉजिक के हिसाब से आग में कुछ भी डालना परमेश्वर को मिलाना होता है?करोड़ो भूखे बच्चे है जिनके मुंह मे अन्न नही डाल रहे है आग में फालतू जला रहे है?कुतर्क का कोई जवाब नही होता है शिव नामक कोई प्रतिभा सम्पन्न महापुरुष नही हुवे बल्कि स्वयं परमेश्वर का नाम है ये।शिव लिङ्ग उसका प्रतीक है सारा जगत ही शिव रूप है विज्ञान कहता है कि सारा ब्रह्मांड ही अंडाकार ठोस रूप है जो हिरण्यगर्भ है ये हिरण्यगर्भ ही शिव है जिसका ही प्रतीक रूप शिवलिंङ्गः है।खोट आप की बुद्धि में है जिसको आप शिव पर आरोपित कर रहे है।
Saturday, September 8, 2018
कुत्तिया बड़ा सभ्य नाम
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
इंसान के आते
बहुत काम
होते वफादार बहुत
घर रखवाली करते खूब
धना सेठो के बंगले
रक्षित इनसे सँगले
उनकी भाषा लेकिन
है बहुत गन्दा नाम
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
जो रोटी देता उनको
कभी नही काटते इनको
मर जाते लेकिन मालिक
आंच न आ पाती
देश द्रोही न होते
न हिन्दू को कोसते
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
दत्तात्रेय के गुरु है ये
युधिष्ठिर संग जाने वाले
स्वर्ग में जीवित
दुर्लभ काम करने वाले
जिस थाली में खाते
उसमे छेद कभी न करते
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
वो मूर्ख अज्ञानी
जो देशद्रोहियों को
कहते
लाज न आती उनको
इस पुण्य पावन जीव को
अपमानित यो करते
कुत्तिया कुत्तिया
बड़ा सभ्य नाम
Sunday, August 12, 2018
नायपॉल का चला जाना
मेने भारत एक आहत सभ्यता को बार बार पढ़ा। लेखक ने एक बाहरी और एक भारतीय दोनो की भूमिका का एक साथ निर्वाह किया है।गांधी,गरीबी और बाहरी आध्यत्मिक पुट की समालोचना सोचने को मजबूर कर देती है शिवसेना की मजदूर शाखा के झोपड़पट्टी वासी की झोपड़ी में बाबा साहब की तश्वीर और वहां का वर्णन जीवन्त जान पड़ता है।
नायपॉल का अपने आस पास के घटनाक्रम का वर्णन सजीव हो उठता है एमन्ग द बिलिवर्स एक तरीके से भविष्यवाणी है विश्व ने जो isis जैसे को भोगा व भोग रहा है उसके बीज की व्याख्या बड़े सलीके से बताई है।
रामजन्म भूमि जन आंदोलन को हिन्दुओ और हिंदुस्थान का एक नया करवट एक अध्याय मानने वाले चंद लेखकों में से एक।
खरी खरी लिखने की जिद्द ही नोबल में देरी करवाती है।
शत शत नमन।
हिंदुओं को अपने हीरे की परख नहीं है ये नायपॉल को देख के पता चल जाता है।
Wednesday, July 18, 2018
कलाम साहब
भारतीय परंपरा में अनेकों महान पुरुष हुए हैं अपने कृतित्व और व्यक्तित्व से राष्ट्र को महान बनाने में अदभुत योगदान दिया। प्राचीन काल में इस प्रकार का मानव हित का चिंतन करने वाले ऋषि कहे जाते थे और जो समाज की रक्षा और हित चिंतन करते उनको देव कहते थे और कोई कोई ऐसे विरले होते जो समय की धारा को पलटकर मानवता की उन्नति में मील का पत्थर बनते अवतार कहे जाते थे एक आम हिंदू मन मनुष्य को सामान्य व्यक्ति की श्रेणी से उठाकर ईश्वर के समक्ष ले जाने में भी संकोच नहीं करता है। हिंदू धर्म शास्त्र प्रत्येक व्यक्ति के अंदर ईश्वर की अभिव्यक्ति मानते हैं किसी भी व्यक्ति को उसके कर्तव्य कर्म के द्वारा ईश्वर तक ले जाने को भारतीय परंपरा में अनुचित नहीं माना गया है।
अगर अगर हम प्रश्न पूछे आधुनिक समय में सबसे ज्यादा स्वीकार्य कौन से महापुरुष है तो हमारे दिमाग में तुरंत ही स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी का नाम आ जाएगा अगर हम इस प्रश्न को थोड़ा और जटिल बनाते हुए पूछें कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा स्नेह चाहने वाले कौन व्यक्ति हुए हैं हो सकता है थोड़ी देर के लिए हमको सोचना पड़े लेकिन अधिकांश भारतीयों के लिए वह नाम जो होगा वह एपीजे अब्दुल कलाम भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महानतम वैज्ञानिक।
भारतीय भारतीय लोग किसी भी विषय का गहन चिंतन कर आविष्कार करने वाले को ऋषि कहते थे आधुनिक भारत के ऋषि मुनि हमारे यह महान वैज्ञानिक है जिन्होंने भारत को उन्नत बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया है जिनके कारण भारत आज तरक्की की राह पर है उस परंपरा के वाहक है कलाम साहब ।वह जनता के राष्ट्रपति थे सारी उम्र वह एक शिक्षक और विद्यार्थी बन कर रहे भारत के लोगों को विज्ञान के विषय में अधिक से अधिक रुचि उत्पन्न कर आगे बढ़ने को वह हमेशा प्रेरित करते रहे और रहेंगे। स्वामी जी विवेक विवेकानंद की ही तरह उनका विश्वास युवाओं और युवाओं के सपनों में था वह कहते थे ग्रामीण स्तर तक विज्ञान और आधुनिक ज्ञान का प्रकाश पहुंचे।
कलाम कलाम साहब भारत की सामाजिक सहिष्णुता और सौहार्द के जीते जागते प्रतीक हैं वह ना केवल एक वैज्ञानिक है बल्कि एक महान दार्शनिक भी थे जो एक साथ विज्ञान और धर्म के बुनियादी चिंतन को लेकर चलता है इसके लिए धर्म कोई बाहरी आडंबर नहीं है बल्कि मूलभूत सिद्धांत है। हमेशा से ही भारत में सभी मार्गों को ईश्वर का ही मार्ग कहे जाने की परंपरा रही है कलाम साहब उसी मार्ग के अनुगामी है।
इसीलिए इसीलिए एक सामान्य हिंदू मन में उनको ऋषि तुल्य मानकर उनका मंदिर जो बनाया दो क्रिकेटर मोहम्मद कैफ भी तारीफ करने से अपने आप को रोक नहीं पाए यही भारत की विशेषता है यही भारत का सम्मान है।

