Friday, December 29, 2017

#krishi किसान के दो शत्रु जातीय सोच और दास मानसिकता।

जातिवाद में फंसे किसान वास्तविक समस्या को नही समझ पा रहे है वो सोच रहे है कि सब चीज फ्री में मिल जाएगी तो देश का भला हो जाएगा।जबकि सच ये है कि फ्री में सब डूब जाएगा ऐसी हल्की राजनीति करने वाले नेताओं के साथ लोग फ्री और जातिवाद के कारण लोग खड़े हो जाते है पर मिलना कुछ नही है।
शासन व्यवस्था प्रत्येक वर्ग का हित करे किसान से ले प्रधानंत्री तक सबका कल्याण हो इसलिए ही भारतीय किसान संघ काम करता है।किसान को भारतीय हिन्दू वांग्मय में बहुत महत्व दिया है विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में कृषि का गौरवपूर्ण उल्लेख मिलता है ।अक्षैर्मा दीव्यः कृषिमित्‌ कृषस्व वित्ते रमस्व बहुमन्यमानः । ऋग्वेद-३४-१३।अर्थात जुआ मत खेलो, कृषि करो और सम्मान के साथ धन पाओ।
कृषि करो और सम्मान के साथ धन पाओ मतलब कि उपज का पूरा दाम मिलें।प्राचीन हिन्दुओ ने उस पध्दति को खोज निकाला था जिसमे पूरा का पूरा जीवन ही कृषि के आधार पर चलता था और उस कृषक का सम्मान इतना ज्यादा था कि वो हिन्दू व्यवस्था का मेरुदण्ड था लेकिन मुगलो और अंग्रेजो की लूट ने उसको बहुत हद तक प्रभावित किया बाद कि सरकारो के अन्धनधुकर्ण से गलत नीतियों से कृषि आज घाटे का सौदा बन गया है साफ है कि सरकारों की नीतियां गलत है वो दुनिया का उन्नतम किसान देने वाली प्राचीन कृषि पध्दति कीजगह विदेशी सोच के आधार पर चलने वाली आसुरी कृषि पद्धति को अपनाया।नतीजा अन्नदाता दिनों दिन दरिद्रनारायण होता जा रहा है।भारतीय किसान संघ की सर्वसमावेशी सोच मुझे अच्छी लगती है।इसमें न केवल भारत के किसान का बल्कि सम्पूर्ण भारत का ही नही मानवता का कल्याण है।

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