मेने विज्ञान विज्ञान का रोना रोते उन लोगो को देखा है जो विज्ञान गणित में ग्रेस से पास होते थे।जिनके बस की विज्ञान थी नही जो आर्ट्स में घुसे फिर येन केन डिग्री करके विशेष सोच के लोगो से जुड़ कर प्रगतिवादी बन गए अब वो लोग विज्ञान विज्ञान चिल्लाते घूमते है ऐसे गधों को जातीय द्वेष के चलते अनुयायी भी मिल जाते है।कोई उनसे पूछे कि तुम अगर विज्ञानवादी हो तो पोलिटिकल या राजनीति से कैसे प्रोफेसर हो?रसायन या भौतिकी या चिकित्सा या अभियंत्रिकी या जैविकी से क्यो नही?ध्यान देना मित्रो विज्ञान चिल्लाने वाला पूरी जिंदगी अवैज्ञानिक काम करता है।चवँनो को तरह रात को दारू पीके गाड़ियों को भिड़ा देने वाले और ऐसे तथाकथित त्योहार को मनाने को वकालत करने वाले वो ही लोग है जो सबसे ज्यादा विज्ञान का रोना रोते है।हिन्दू विक्रम संवत पूर्णत विज्ञान पर आधारित है इसमें एक साथ खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान तो जुड़ा ही है साथ मे मानव मनोविज्ञान भी जुड़ा है तो मानव शरीर विज्ञान भी।हिन्दू त्योहार कोई यो ही नही आता है।तुम्हारी समझने की अक्ल कम है जो इसको समझ नही पाते या यों कहें समझना नही चाहते।
Sunday, December 31, 2017
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