Saturday, December 22, 2018

हिन्दू परिवार व्यवस्था हिन्दत्व का आधार

हिंदुत्व बहुत ही व्यापक है।हिंदुत्व के कार्य का छोटा सा झलक है मन्दिर।मन्दिर मठ महात्मा ये तीन का मिलन हिंदुत्व को जानने में सहायता करता है पर उतना पर्याप्त नही रहता है क्योंकि ये तो जीवन के कण कण में बिखरा पड़ा है इस कारण ही मंदिरों के टूट जाने से मठों के उजड़ जाने से और महात्माओ की सामूहिक हत्याओं के बाद भी हिंदुत्व पूरी तरीके से नष्ट नहीं हुवा।पर कोई इस गुमान में न रहे कि ये सनातन है अतः कभी नष्ट नही हो सकता है।क्योंकि आज अफगानिस्थान या पाकिस्थान जैसे इलाको में नाम लेवा तक नही बचा है।
इस हिन्दू जीवन पद्धति का आधार है गृहस्थ धर्म।याने परिवार व्यवस्था।इस सयुंक्त हिन्दू परिवार व्यस्वथा ने अभी तक सभी प्रकार के आसुरी तत्वों को पटखनी दे रखी है 90 के दशकों से आया टीवी फिर इंटरनेट आदि से उत्पन्न भयंकर व्यक्तिवादी सोच ने इस परिवार व्यवस्था को तबाह करना शुरू कर दिया है जिस काऱण आज हिन्दू असुरक्षित ही नही बल्कि कैसे भी आसुरी विचार का आसानी से भक्ष्य हो गया है।
इस परिवार व्यवस्था को तोड़ने के लिए ही रात दिन आपका मीडिया नेट चेनल फ़िल्म आदि आदि लगें हैं।पहले तो एक मोहल्ला तक पूरा परिवार लगता था आजकल तो स्वयं का परिवार ही परिवार नही होता क्योंकि उपभोक्ता वाद के फर्जी सोच ने "my life my choice" टाइप मूर्खता पूर्ण सोच हावी कर दी।अतः हिन्दुओ का बहुत जल्दी ही पतन होने की सम्भवना है राह केवल और केवल पारिवारिक मूल्यों के आधार पर बनी हिन्दू परिवार व्यवस्था ही है।
देखो राम जी को उनकी माता कैकई ने या पिता दसरथ ने नही कहा था वनवास जाने को वो अपना धर्म समझ कर स्वयं ही चल दिये।आज वैसे राम मिलना दुर्लभतम है।और वैसा राम अगर पैदा नही हो पा रहा है तो राम जी का हमसे रूठना तय है।
इस लिए ही
हिन्दू बनो हिन्दू रहो हिन्दू जिओ

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