आप चाहे तो जाती को खारिज कर सकते है आपकी मर्जी है आप चाहे तो जाती तोड़ने का नारा लगाया सकते है पर जाती न तो जाती है न ही खारिज होती है क्योंकि मूलतः जातीय चरित्र को नही समझा।जो नही समझा तो नही पार पा सकते है इससे।जाती तोड़ने का हांका लगाने वाले दिनों दिन अधिक से अधिक संकुचित होते जाते है और जिन पर ये तोहमत है कि वो जातिवादी है वो जाती का ज्यादा लोड लेना बन्द करते जाते है।जाती के नाम से फायदा उठाने वाले कभी भी जाती नही तोड़ सकते है क्योंकि जाती उनको सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन देती है अपनी इसी सुरक्षा या असुरक्षा की भावना में हिन्दू द्रोहियों से मिल जाने में भी संकोच नही करती है ये ही जाती सोच का नतीजा होता है।अब बिना जाती को गाली गलौच किये अपने को हिन्दू जाती का मानने से दायरा बहुत बढ़ जाता है अपने आप सामर्थ्य पैदा होता है मैं हिन्दू हूँ इस भाव मे अत्यंत सामर्थ्य निहित है इसकी अनुभूति करनी पड़ती है।पल में हिन्दू पल में पुष्करणा हो जाने से नहीं आता है ये तो दिन के चारो प्रहर,सातों दिन, साल भर उम्र भर का नाता है उम्र ही क्यों जब तक मनुष्य जन्म होता रहेगा तब तक का।अमूमन हिन्दू स्वयं को हिन्दू नही मान जाती मानता है इसलिए बेचारा हर जगह अकेला रहता है जहाँ थोड़े बहुत खुद जैसे सोचने वाले हो तो अलग बात है।वरना तो असुरक्षा के भाव मे ही गुजरता है।अमूमन जाती का भाव शादी ब्याह या वोट में तगड़ा लगता है बाकी जगह तो खैर।
तो इस तरह से जाती हिन्दुओ को नुकसान करने लगती है खुद की जाती का बुरा से बुरा व्यक्ति भी दूसरी जाति के महात्मा से भी बढ़िया लगने लगता है ये वह समय है तब ठीक इलाज की जरूरत है वरना मार्ग भटका जा सकता है अपनी हर सफलता-असफलता व्यक्तिगत न होके जातिगत नजर आती है सारा संसार जाती का बेरी जान पड़ता है गोया सबको आपकी बहुत पड़ी हो।जाती के लिए सत्ता पाने का नशा सा रहता है सत्ता सुंदरी दूर नजर आती है।दलबन्दी का तड़का ऊपर से स्वाद अलग देता है।इस सबके बीच हिंदुत्व कही साइड में खड़ा मिलता है हिन्दुओ के आराध्य टेंट में।
मजे की बात तो ये है कि श्री राम की ही वंशावलि में हुवे बुद्ध अहिन्दू दिखते है।
इसे ही तो कहते है असली भृमजाल।
हिन्दू बनो,हिन्दू रहो,हिन्दू जिओ।
Thursday, December 20, 2018
हिन्दू बनो हिन्दू रहो हिन्दू जिओ
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