मुझे भारत की न्यायिक सिस्टम पर पूरा भरोसा है भले ही जज की विचारधारा कुछ भी हो वो निर्णय देते समय हमेशा तथ्य देखते है ठीक है कभी कभी हमको लगता है गलत हुवा है पर वो हमारा राग द्वेष होता है।कौन जाने इस मंथन से अमृत निकले?कल हलाहल तो निकल ही चुका है अब अमृत की ही बारी है........।देश मे शायद ऐसा पहली बार हुवा है कि इतने सारे लोगो को सहानुभूति सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ है।संविधान अनुसार ही देश चलेगा अगर किसी भी व्यक्ति ने संविधान का उल्लंघन किया तो उसको सजा मिलनी चाहिए पर मात्र अटकलों के आधार पर सनातन धर्म मे निष्ठा रखने वाले जस्टिस दीपक मिश्रा को आरोपो के घेरे में कृपया न खड़ा करें,कल उन्होंने इस मंथन का हलाहल पी लिया था सोचे क्या होता वो भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देते वापस हाथों हाथ?गम्भीर संवैधानिक संकट खड़ा नही हो जाता?कौन सा केस किसको देना है ये तय करना चीफ जस्टिस का अधिकार है तो इससे बाकी को क्यों ईगो प्रॉब्लम होनी चाहिए?फिर एक सामान्य व्यक्ति की नजर से सोचे कि अगर एक केस को कोई मिश्रा देखे या कोई कुरियन देखे तो क्या फर्क पड़ता है?तो किसी कुरियन को आपत्ति क्यो होनी चाहिए?हमारे लिए तो दोनों ही सम्मानीय जज है अगर कुरियन साहब को चेलेश्वर साहब को गोगोई साहब और मदन साहब को आपत्ति है तो सब मिल कर महामहिम के पास जा सकते है राष्ट्र के मुखिया तो वो ही है न?फिर ये कैसी प्रेस कॉन्फ्रेंस जिसमे आप पर सन्देह हो रहा है?एक विशेष विचारधारा के लोग से ही आप लोग क्यो गिरे हुवे है?आपने माना है कि चीफ ही तय करते है केस फिर भी वो रेशनल नही है?इसका क्या अर्थ?अगर आपको लगता है कि आपके साथी जज चीफ को छोड़ कर के वो उचित नही है तो आप न्यायपालिका की अवमानना नही कर रहे है?आखिर जस्टिस करनन ने भी तो ये ही कहा और किया था न?तब आप सभी ने मिलकर उनको सजा क्यो दी?उनसे माफी मांगिये अब या फिर खुद सजा भुगतिये।करनन साहब ने भी ये किया था जो अब आप चार लोग कर रहे है
1 बिना तथ्य के आरोप लगाना
2 पूरी न्यायपालिका पर सन्देह पैदा करना
3 न्यायमूर्तियों को जाती के आधार पर बांटना
4 खुद को छोड़ बाकी सभी जजो को बिका हुवा कहना
5 केसों के मामले में सामान्य से कनिष्ठ अभियंता स्तर तक के कर्मियों की तरह बच्चों की तरह झगड़ना
6 मात्र चीफ जस्टिस नही बल्कि बाकी सभी जजो पर सन्देह करना
7 आज कुछ लोग आप पर कुछ लोग चीफ पर अंगुली उठा रहे है क्या ये सही हो रहा है?
8 क्या गरीब आदमी दिग्भर्मित नही हो गया है?
9 क्या यह एक प्रकार का नक्सलिज्म नही है जिसमे स्थापित सभी संस्थाओं पर सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में आप सभी का कभी नही भरने वाला भयंकर आघात है?
10 क्या न्याय भी अंहकार से चलेगा?
दुःखद बहुत दुःखद।सच मे एक विशेष विचारधारा अभी भी लोकतांत्रिक हार को पचा नही पा रही है।पार्टियां आएगी चली जायेगी मोदी आप मैं सभी काल के गराल घाह में समा जाएंगे तो भी ये राष्ट्र जीवित रहेगा और उस राष्ट्र को बहुत मेहनत से हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने सही मार्ग पर लगाया है सिस्टम डेवलप करने की कोशिश की है किया है शिकायते बहुत है हमको,उसका समाधान भी तो हमारे सिस्टम में ही है न?
क्यो आप लोग लगातार हार से फ्रस्ट्रेड एक विशेष सोच के लोगो को अराजकता की ओर धकेल रहे हो?
सुन लीजिए सर जी!! राष्ट्र आप सब से बहुत बड़ा है............।
Friday, January 12, 2018
हमारा संविधान हमारी शान,हमारा सुप्रीम कोर्ट हमारी पहचान।
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